Think again लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Think again लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 21 दिसंबर 2016

मेरे आंगन की वंश बेल

why plants are neglected

बरस पर बरस बीत गए एक बेल को पलते आंगन में
कभी बढती कभी थोड़ा रूक कर बढती ये स्नेह बेल
कीड़ो और बिन बुलाई ऋतुओं से बचती ये अमर बेल
लम्बे अर्से से क्यों कुम्हलाई हुई है मेरी भाग्य संगिनी ये
सुबह सवेरे खिलखिलाकर हँसती थी जो आगंन मे बेल
कैसी आहट किसकी नफरत में अब जलती हो रानी बेल
सबको संबल देनेवाली,पीड़ा सबकी हरने वाली बेल
किसकी नज़र से तुम ढल रही हो मेरी साथी बेल
एक पौध तुम्हारी अब बढने लगी है बाबूजी की बेटी के घर
प्यार बंटा,वहां कुछ ज्यादा वक्त बिता वो लौटे कहां
घर भूले,घर का आगंन भूले और भूल गए वो रानी बेल

सोमवार, 24 अक्टूबर 2016

प्रभु इच्छा,God Wish

Sea,Sky,Bermuda,Triangle,hexagonal,Mystery,Missing,Air,bombs,Earth,War,Research

आकाश में छल है
सागर में बल है
धरती पे समर है
पाताल में परत है
सृष्टि की प्रत्येक हलचल में
प्रभु इच्छा निहित है
माया है उनकी कर्म हमारा

शनिवार, 22 अक्टूबर 2016

अतिथि देवो भवः

 

PierceBrosnon,Indianculture,Tradition,Cheating,Timesofindia,Panmasala

अतिथि देवो भवः
भारत की भूमि पर हर घर में यही संस्कार पले
फिर क्यों विदेशी सैलानी हर बार ठगे जाते है
पूरे विश्व में फैली ख्याति जिन संस्कारो की
आज वही पर मैली हो गयी चादर उन संस्कारो की
एक छोटे से हित के खातिर फिर बलि चढ़ गए संस्कार
आखिर कितने छोटे पड गए अपने ही घर में हम आज
राह दिखाने वाले ने राहगीर को लूट लिया
एक रिश्ता विश्वास का था वो भी खुद से छीन लिया

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

हँसना कब से भूल चुके थे हम

kapil,laughter,laugh,life,depression,peom,creativewriting,kapilshow,Indian,famous,laughtershow
हँसने की एक वजह कहाँ से लाये
रोज रोज की भागम भाग निराशा ही भर जाये
कोई खींचे, कोई पीछे, जीवन अश्को में ही बीते
हँसना कब से भूल चुके थे हम
फिर एक दिन एक चेहरा ढेरो खुशियां लाया
हफ्ते के दो दिनों को उत्सव समान बनाया
ना अभद्र व्यवहार, ना अशिष्ट ही भाषा
भोले से चेहरे ने रोते को भी हँसाया
सीधी सच्ची बातें जीवन में पल में देते उतार
कुछ घंटो में जग में भर देते कपिल जीने की शक्ति अपार

स्पोर्ट्समैनशिप

Sania,SanjayManjrekar,twitterwar,Right,Wrong,No1,Teaching,Creativewriting

Sania,Sanjay Manjrekar,Twitterwar,Number one,Times poll,socialnetwork
बचपन से सुनते आये है 
जीवन में हार जीत से ज्यादा स्पोर्ट्समैनशिप  है ज़रूरी
 

किन हस्तियों को देखकर कहावत  गई बनायीं
आज के हालात तो कुछ और ही इशारा करते है

स्पोर्ट्स के इंस्टेंट जवाबी संसार ने नए standard किये है तय
खेल की भावना को मारो गोली, ट्विटर हैंडल है सबसे ज़रूरी

बुधवार, 19 अक्टूबर 2016

करवाचौथ

husband,wife,moon,fast,vrat,relation,rishta,satire,television.

कुंडली के सप्तम भाव ने तय किया जो स्नेह मेल
आज के दौर में सुनते,देखते है उसके अजब खेल
इतिहास हो गए राम से पत्नी प्रेमी
और लुप्त हो गयी सती स्वरूपा नारी
कुछ टीवी ने बदला प्यार का अनूठा रिश्ता
जिसमे दिल "पर" नारी पर ही फिसला
कुछ फेसबुक ट्विटर ने किया कमाल
मेल मेल पे  दिल भी बदले,बिल भी बढ़ गए
सात फेरो के बंधन में बंधते थे जो सात जन्म के रिश्ते
अब एक जन्म में बदले नर- नारी  सात आठ भी रिश्ते

हँसना मना है

लड़की मुस्कुराहट पर ताला तो लगा

इस हंसी के अर्थ मुश्किल में डाल देंगें


थोड़ा हंसोगी तो शुरूआत समझी जाएगी


खुलकर हंस दी तो फंस गई ऐलान हो जाएगा


ये पुरूषो की दुनिया के मतलब बड़े मतलबी हैं


तुम हंसोगी दिल से और उसके हौंसले बुलंद होंगे 


अपनी मां बहन को भूलकर पैमाने बनाते हैं

अब सोचो "हंसी तो फंसी"जुमला किसने मशहूर किया

शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

एक रोटी और बच्चे दो

एक दुखियारी माँ की सुनो
 ये विपदा भारी
रोटी देखकर रोती जाये ..
रोते रोते कहती जाये
एक रोटी और बच्चे दो
कौन रहेगा भूखा आज
 किसे मिलेगी ऱोटी आज
माँ बोली सुन लाडली मेरी
भैया को दे  तोहफा आज
बेटी भूख से तड़पी तो
माँ बोली सुन कहानी रानी
कल जब होगी किसी की शादी
तुझे मिलेगी पूरी भाजी
सपने में दावत भी देखी
लेकिन सुबह तक आस भी टूटी
माँ की लाडली रूठ गयी
प्राण पखेरू छोड़ गयी
आखिर जीती कैसे वो
जिस माँ की पीड़ा ये हो
एक ऱोटी और बच्चे दो

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

नारी मन


अविरल स्वछंद मेरे मन की गंगा बह निकली
वेग मे करूणा का प्रबल आवेग
ज्यो सागर मे उठते गिरते ज्वार भाटा अनेक
कल कल छल छल ज्यू ब्रह्मपुत्र मे अश्रु समावेश
इस नारी मन की पीर की थाह न पाया कोई
बांध बने सरपट कभी तो राह मिले जग को सही

बुधवार, 25 मार्च 2009

बढ़ते कदम

बढ़ते कदमो को अगर मिल जाए सही रास्ता सही मंजिल और थोडी रौशनी तो कौन कहता है ज़मीन पर स्वर्ग बन सकता नही
देश के युवाओ मैं ज़ज्बा वो चाहिए जिसमे कदमो के आगे बढ़ने की आग हो बड़े बुजुर्गो का अनुभव हो तो किस वीराने को गुलज़ार किया जा सकता नही ॥
निराशा को बढ़ते कदमो ने हमेशा पीछे छोडा है ..मंजिलो पर सदा बढ़ते कदमो की सफलता ने परचम सजाया है
याद रहे
कदम बढ़ाना है मंजिल को पाना है