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गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

स्पोर्ट्समैनशिप

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बचपन से सुनते आये है 
जीवन में हार जीत से ज्यादा स्पोर्ट्समैनशिप  है ज़रूरी
 

किन हस्तियों को देखकर कहावत  गई बनायीं
आज के हालात तो कुछ और ही इशारा करते है

स्पोर्ट्स के इंस्टेंट जवाबी संसार ने नए standard किये है तय
खेल की भावना को मारो गोली, ट्विटर हैंडल है सबसे ज़रूरी

बुधवार, 19 अक्टूबर 2016

करवाचौथ

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कुंडली के सप्तम भाव ने तय किया जो स्नेह मेल
आज के दौर में सुनते,देखते है उसके अजब खेल
इतिहास हो गए राम से पत्नी प्रेमी
और लुप्त हो गयी सती स्वरूपा नारी
कुछ टीवी ने बदला प्यार का अनूठा रिश्ता
जिसमे दिल "पर" नारी पर ही फिसला
कुछ फेसबुक ट्विटर ने किया कमाल
मेल मेल पे  दिल भी बदले,बिल भी बढ़ गए
सात फेरो के बंधन में बंधते थे जो सात जन्म के रिश्ते
अब एक जन्म में बदले नर- नारी  सात आठ भी रिश्ते

हँसना मना है

लड़की मुस्कुराहट पर ताला तो लगा

इस हंसी के अर्थ मुश्किल में डाल देंगें


थोड़ा हंसोगी तो शुरूआत समझी जाएगी


खुलकर हंस दी तो फंस गई ऐलान हो जाएगा


ये पुरूषो की दुनिया के मतलब बड़े मतलबी हैं


तुम हंसोगी दिल से और उसके हौंसले बुलंद होंगे 


अपनी मां बहन को भूलकर पैमाने बनाते हैं

अब सोचो "हंसी तो फंसी"जुमला किसने मशहूर किया

सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

"मैं"

"मैं" का जगत बहुत ही छोटा
अक्षर ज्ञान जितना भी हो
इंसान असफल ही होता है
"मैं" की शक्ति कितनी भी हो
"मैं"  की भक्ति कितनी भी हो
इंसान अकेला होता है
"मैं"  ने मारा रावण को
पर मैंने नही मारा मन के "मैं"  को
अब पल पल मैं ही मरता हूं
भीड़ भरे मेले मे मैं बस खुद से बातें करता हूं

शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

एक रोटी और बच्चे दो

एक दुखियारी माँ की सुनो
 ये विपदा भारी
रोटी देखकर रोती जाये ..
रोते रोते कहती जाये
एक रोटी और बच्चे दो
कौन रहेगा भूखा आज
 किसे मिलेगी ऱोटी आज
माँ बोली सुन लाडली मेरी
भैया को दे  तोहफा आज
बेटी भूख से तड़पी तो
माँ बोली सुन कहानी रानी
कल जब होगी किसी की शादी
तुझे मिलेगी पूरी भाजी
सपने में दावत भी देखी
लेकिन सुबह तक आस भी टूटी
माँ की लाडली रूठ गयी
प्राण पखेरू छोड़ गयी
आखिर जीती कैसे वो
जिस माँ की पीड़ा ये हो
एक ऱोटी और बच्चे दो

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

नारी मन


अविरल स्वछंद मेरे मन की गंगा बह निकली
वेग मे करूणा का प्रबल आवेग
ज्यो सागर मे उठते गिरते ज्वार भाटा अनेक
कल कल छल छल ज्यू ब्रह्मपुत्र मे अश्रु समावेश
इस नारी मन की पीर की थाह न पाया कोई
बांध बने सरपट कभी तो राह मिले जग को सही

मंगलवार, 5 मई 2009

जिम्मेदार कौन??

कितने और साल यह दुहाई दी जाती रहेगी की अभी वक्त ही कितना हुआ है देश को आजाद हुए ..अभी हम विकासशील देशो की श्रेणी में है..कब तक यह मीठा और धीमा ज़हर जनता को दिया जाता रहेगा की जिसका असर जब दिखाए देने लगे तो ज़हर देने वाले की पहचान ही बदल चुकी हो...सरकार बनने वाले दल का हर व्यक्ति अमीर और विकसित हो जाता है पर जनता का हाल ज्यो का त्यों रह जाता है ..सुधार के नाम पर आश्वासन पा रही जनता को भी संभालना होगा..क्योकि सरकार बनाने का हक ख़ुद को सुरक्षित हाथो में सोपने का हक जनता के पास है और इसका उपयोग अगर सोच समझकर सही नेता के लिए हो गया तो विकास की गंगा को कौन रोक सकता है॥
अपने हक के लिए जनता को सवाल करने का हक तभी है जब हम मतदान की प्रणाली में विश्वास रख कर सोच समझकर मतदान कर एक अच्छे वोटर का कर्तव्य निभाएगे
आज ज़िम्मेदारी से मुह मोड़ने का अर्थ है कल विपतियों का बोझ ढोना॥
आइये प्रण करे कि मतदान करेंगे और सही प्रत्याशी के लिए करेंगे॥

बुधवार, 25 मार्च 2009

बढ़ते कदम

बढ़ते कदमो को अगर मिल जाए सही रास्ता सही मंजिल और थोडी रौशनी तो कौन कहता है ज़मीन पर स्वर्ग बन सकता नही
देश के युवाओ मैं ज़ज्बा वो चाहिए जिसमे कदमो के आगे बढ़ने की आग हो बड़े बुजुर्गो का अनुभव हो तो किस वीराने को गुलज़ार किया जा सकता नही
निराशा को बढ़ते कदमो ने हमेशा पीछे छोडा है ..मंजिलो पर सदा बढ़ते कदमो की सफलता ने परचम सजाया है
याद रहे
कदम बढ़ाना है मंजिल को पाना है