बुधवार, 19 अक्टूबर 2016

हँसना मना है

लड़की मुस्कुराहट पर ताला तो लगा

इस हंसी के अर्थ मुश्किल में डाल देंगें


थोड़ा हंसोगी तो शुरूआत समझी जाएगी


खुलकर हंस दी तो फंस गई ऐलान हो जाएगा


ये पुरूषो की दुनिया के मतलब बड़े मतलबी हैं


तुम हंसोगी दिल से और उसके हौंसले बुलंद होंगे 


अपनी मां बहन को भूलकर पैमाने बनाते हैं

अब सोचो "हंसी तो फंसी"जुमला किसने मशहूर किया

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2016

श्वेत का समर्पण श्याम को

श्वेत का समर्पण श्याम को
जैसे दिन खो जाए शाम में 

 गोरी राधा का प्रेम श्याम से

जीत को मिले भाव हार से
सफर
का आगाज़ हो मंज़िल

प्रकाश समझ मे ना आए 
बिना अंधकार मे जाए
जीवन की जोत मिल जाए 

आखिर प्रकाश पुंज में

यही है श्वेत का समर्पण श्याम को

सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

"मैं"

"मैं" का जगत बहुत ही छोटा
अक्षर ज्ञान जितना भी हो
इंसान असफल ही होता है
"मैं" की शक्ति कितनी भी हो
"मैं"  की भक्ति कितनी भी हो
इंसान अकेला होता है
"मैं"  ने मारा रावण को
पर मैंने नही मारा मन के "मैं"  को
अब पल पल मैं ही मरता हूं
भीड़ भरे मेले मे मैं बस खुद से बातें करता हूं

शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

एक रोटी और बच्चे दो

एक दुखियारी माँ की सुनो
 ये विपदा भारी
रोटी देखकर रोती जाये ..
रोते रोते कहती जाये
एक रोटी और बच्चे दो
कौन रहेगा भूखा आज
 किसे मिलेगी ऱोटी आज
माँ बोली सुन लाडली मेरी
भैया को दे  तोहफा आज
बेटी भूख से तड़पी तो
माँ बोली सुन कहानी रानी
कल जब होगी किसी की शादी
तुझे मिलेगी पूरी भाजी
सपने में दावत भी देखी
लेकिन सुबह तक आस भी टूटी
माँ की लाडली रूठ गयी
प्राण पखेरू छोड़ गयी
आखिर जीती कैसे वो
जिस माँ की पीड़ा ये हो
एक ऱोटी और बच्चे दो

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

नारी मन


अविरल स्वछंद मेरे मन की गंगा बह निकली
वेग मे करूणा का प्रबल आवेग
ज्यो सागर मे उठते गिरते ज्वार भाटा अनेक
कल कल छल छल ज्यू ब्रह्मपुत्र मे अश्रु समावेश
इस नारी मन की पीर की थाह न पाया कोई
बांध बने सरपट कभी तो राह मिले जग को सही

मंगलवार, 5 मई 2009

जिम्मेदार कौन??

कितने और साल यह दुहाई दी जाती रहेगी की अभी वक्त ही कितना हुआ है देश को आजाद हुए ..अभी हम विकासशील देशो की श्रेणी में है..कब तक यह मीठा और धीमा ज़हर जनता को दिया जाता रहेगा की जिसका असर जब दिखाए देने लगे तो ज़हर देने वाले की पहचान ही बदल चुकी हो...सरकार बनने वाले दल का हर व्यक्ति अमीर और विकसित हो जाता है पर जनता का हाल ज्यो का त्यों रह जाता है ..सुधार के नाम पर आश्वासन पा रही जनता को भी संभालना होगा..क्योकि सरकार बनाने का हक ख़ुद को सुरक्षित हाथो में सोपने का हक जनता के पास है और इसका उपयोग अगर सोच समझकर सही नेता के लिए हो गया तो विकास की गंगा को कौन रोक सकता है॥
अपने हक के लिए जनता को सवाल करने का हक तभी है जब हम मतदान की प्रणाली में विश्वास रख कर सोच समझकर मतदान कर एक अच्छे वोटर का कर्तव्य निभाएगे
आज ज़िम्मेदारी से मुह मोड़ने का अर्थ है कल विपतियों का बोझ ढोना॥
आइये प्रण करे कि मतदान करेंगे और सही प्रत्याशी के लिए करेंगे॥

शनिवार, 28 मार्च 2009

भीड़

उत्सव हो या दुर्घटना भीड़ कही भी एकत्रित हो जाती है..पर इस भीड़ का स्वरुप कौन समझ पाया है..यह सैलाब अचानक आता है और छट जाता है ..इस भीड़ ने वक्त बेवक्त इकठ्ठा होकर कभी अपना भला नही किया है ..भला हुआ तो उसका जिसके लिए यह भीड़ जमा हुई..क्यो बिना सोचे हम एक दूसरे के साथ हो लेते है क्यो नही समझ पाते की जो एक कर रहा है ज़रूरी नही वो ही ठीक है ...हमारी अपनी सोच क्या है हमें क्या चाहिए क्या इतना सोचने का भी वक्त नही है हमारे पास॥
विकास कभी किसी के पीछे हो लेने या भीड़ का हिस्सा बनने पर कभी नही हुआ ..उसके लिए ज़रूरत है की हम ख़ुद सोच समझ कर निर्णय ले ..तभी हम देश समाज और परिवार

का भला कर सकते है ॥
हम भीड़ का हिस्सा नही बनेगे ..बल्कि अपनी सोच की ताक़त से ख़ुद अपनी वो जगह बनायेगे जिसमे एकता की ताक़त हो और प्यार का गठबंधन ...
हल्ला बोलना है विकास के लिए ..हक के लिए .. न की भीड़ का हिस्सा बनने के लिए