मंगलवार, 23 मई 2017

उम्मीद और क़ायनात


Ray of hope,God's creation

Pic courtsey Astrospeak
कायनात की हर शय रंग बदलती है
कभी सुंदरता का नया इतिहास गढ़ती है
कभी रौद्र रूप से ब्रम्हांड को भयभीत करती है
कभी सौम्य छटा शांति का सन्देश देती है
प्रकृति की हर छठा में एक निर्देश निहित है
हर निर्देश भविष्य की अचूक परिपाटी है
हर दृश्य  में आलौकिक प्रकाश है
जीवन में लौ भरने की असीम ऊर्जा है
निरंतर कुछ ऐसे प्रस्फुटित होती है
मुरझाये जीवन में नयी तरंगे!
ये रंग बदलते नज़ारे जो जीवन संचालित करते है
हर मन उस शक्ति की खोज में है
जो क़ायनात में रंग भरती है
सत्य है दिव्य शक्ति का अहसास ही है
उम्मीद की वो किरन
जिस पर जीवन कायम है 

बुधवार, 17 मई 2017

वक्त ने बदली चाल

wakt ne badli chal,time
Pic Courtsey :Pics about space.com
वक्त  जितनी  तेजी  से  भाग रहा है
मुद्दे उतनी तेजी से चुप होने लगे है
बड़े से बड़े तूफान पर मरहम रख देता है वक्त
हर दर्द भुलाया जा सकता है वक्त की करवट में
चीखे मद्दम पड़ जाती है वक्त गुजरने के साथ
जीती जागती ज़िन्दगी लाश बन जाती है
लाश की तस्वीर दीवार पर रह जाती है
एक रोज़ तस्वीर भी वक्त की भेंट चढ़ जाती है
इस पीढ़ी को याद नहीं अपनी पिछली पीढ़ी
क्यों लगता है वक्त से तेज ज़िन्दगी भाग रही है
सदियां गुजर जाती थी  जिन रिश्तो को बनने में
आज कुछ लम्हो में प्रगाढ़ रिश्ते बन भी जाते है
फिर कुछ समय में वक्त की भेंट भी चढ़ जाते है
ये वक्त भी सोचता होगा ज़िन्दगी की स्पीड देखकर
अगर मैं रुक सकता तब भी क्या तुझको थाम सकता
सबक नया सीखा है मैंने
ज़िन्दगी तेरी चाल देखकर
अब मैंने  भी रफ़्तार से बहना सीख लिया  

गुरुवार, 4 मई 2017

राम है जीवन दर्शन













Courtesy:Ram Raksha Strot
जितना सरल राम का नाम उतनी जटिल राम की लीला
सौम्य तेजमयी जितनी छवि कठिन तपस्या उतनी रही
सत्य से बढ़कर धर्म नहीं वचन से बढ़कर जीवन नहीं
मनुष्य की शक्ति राम की भक्ति राम है जीवन दर्शन
विश्व ने जाना कृष्ण को राम उन्ही का दूजा नाम
त्रेता युग की मनमोहक छवि घट घट बसे राजा राम
राम नाम संजीवनी ज्ञान सुधा सुख धाम
भोर की पहली किरण है राम, शीतल चाँद की चांदनी राम
राम जगदाता भाग्य विधाता सरल सहज राजा राम
ज्योत जलाई जग को दिखलाई  जीने की राह
सुख त्यागे दुःख भोगे वचन की खातिर महल भी छोड़े
जीवन क्या है राम की माया कभी धूप कभी छाया
राम सत्य है बाकी सब मिथ्या जाने कब समझेगा जग ये लीला

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

बाढ़ ग्रस्त श्वेत नदी

Pic Courtesy -Naiduniya
तन गोरा मन काला
ये मेरे देश की रीत नहीं
मन उजला हो प्रीत भरा हो
बैर से नाता जिसका ना हो
मेरे देश की प्रीत यही
श्याम सुन्दर छवि मोहन की
हर मन में बसती हो जहां
मोरा गोरा रंग लेले मोहे श्याम रंग दे दे
कहती है जहां की नारी सदा
गोरे रंग का मोह वहां कब कैसे चढ़ा
स्वर्ग सी सुन्दर धरती पर
रंग भेद का माया जाल किसने बुना
कब बदली रीत कि मिट गयी प्रीत
जो बह गई श्वेत नदी में
श्वेत नदी की चाह में फंस गए
आज के मोहन सारे
राधा गोरी श्याम भी गोरा
रंग बदल कर चाल बदलना
 नए ज़माने की रीत यही
तन की भक्ति मन की निंदा
आज हमारी पहचान यही
क्यों भूल गए हम
मन उजला हो प्रीत भरा हो
बैर से नाता जिसका ना हो
मेरे देश की प्रीत यही

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

किश्तों में सजा तैयार

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Pic courtesy:The Website Geographer

युद्ध सामने से लड़ने की प्रथा पुरानी हो गई
दुनिया में रीत पीठ पीछे साजिशे रचने की हो गई
हंसकर अभिवादन करना,मदद का हाथ बढ़ाना
पलटते ही व्यंग प्रहार करना,साथी को गलत राह दिखाना
नए ज़माने की कितनी सरल प्रीत बन गई
मेहनत का फल मीठा होता है परिभाषा ही बदल गई
मेहनतकश को गिरा कर रास्ता बनाना कालजई तकनीक बन गई
मैं से शुरू होकर जो रास्ते हम बन जाते थे
उन रास्तो के रोड़े बन गए झूठे अहम् के पत्थर
कभी सम्मान की खातिर जान देते थे जो सज्जन
ईमान से बढ़कर उनका ओहदा हो गया है
सबक क्या दोगे नयी पीढ़ी को
वहाँ भी सफलता का मतलब महत्वाकांक्षाओ को पाना है
फर्क किसको पड़ता है मेहनत के फल की मिठास से
हमें तो चाहिए बढ़ते जीरो ज़िन्दगी से बड़े सेविंग अकाउंट में
अपनी बात का बिना बात वजन बढ़ाना
जीवन मूल्यों की लाश पर अपने मैं का घर बनाना
अगर यही दोगे तुम समाज को
सूद समेत किश्तों में सहोगे बदलते मूल्यों का हिसाब
समय है ठहर जाओ सोचो कहाँ गलत हो तुम
वक्त निकलने पर लकीर पीटने से बच जाओ तुम

मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

उड़ते परिंदे

fly high to return back

Pic Courtesy: Meri Syahi Ke Rang

जो उन्मुक्त गगन में उड़ते है
वो भी अपने घरों को लौटते है
स्वछन्द विचार कितने भी हो
घर की चार दीवारी से टकराते है
पाने को सारा खुला आसमान है
खोने को कुछ गज़ का मकान है

थक कर चूर जब हो जाओ
पंखो को विराम भी दो
पीछे छूटे साथी का इंतज़ार भी हो
लौट आओ जब संध्या हो
उड़ने की कोई वजह ना हो
छोटी सी ज़िंदगानी है
अपनों संग भी बितानी है
जीत के तुम संसार को
हार ना जाना परिवार को

मुट्ठी भर दिन जीवन के
कुछ सपनो में, कुछ उड़ने में
बोलो धरती पर लौटोगे कब
रिश्तो की बगिया में महकोगे कब
जो उन्मुक्त गगन में उड़ते है
वो भी अपने घरों को लौटते है

छोटी सी उम्र में सपने बड़े
जिनसे सीखा उड़ना उनको क्यों कुचल चले
सूरज तक तुमको पहुँचना है
बादल के संग ही उड़ना है
अनुभव और परिश्रम बिन
जीत का फल भी खट्टा है

मंगलवार, 21 मार्च 2017

राम बसे मेरे अंतस में

Ram se bada na koi,Lord Shri Ram














जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

नैन थके पर वो ना दिखे
दीप जलाये, गीत सुनाये
हर पथ पर एक आस जगाये
सागर से मोती चुन लाए
अम्बर से तारे चुन लाए
फिर भी क्यों ना मेरे राम मिले
जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

मंदिर छाने महल भी छाने
वन उपवन और ताल भी छाने
मन मंदिर में लगा के ताले
ढूंढ रही मैं  राम को
जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

उजियारे की किरण दिखी
अंधकार में ज्योत जगी
जिनको ढूंढा घर घर में
राम तो मेरे मन में बसे
जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

जहाँ राम बसे वहाँ छल ना बसे
निर्मल मन में अमिट छवि बसे
छोड़ दिए सारे लोभ और मोह
पहचान लिया मैंने राम को
जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे