मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
शनिवार, 9 दिसंबर 2017
एक नयी दुनिया बनायें
Pic Courtesy:Toddler.org
कुछ सीखो रोशनी से
कुछ अंधेरो से सबक लो
रचकर इतिहास नया
रच दो एक बेहतर दुनिया
कुछ फूलो सा महको
कुछ सागर सा गरजो
जिनकी राह ना कोई
उनकी सड़क बन जाओ
अडिग पर्वत से बनो
कोमल रहो लेकिन मन से
बदल दो दुनिया की चाल
बदलकर अपनी चाल
प्रकृति की सुन्दर कक्षा
मन के नैनो से पढ़लो
जीने का अंदाज़ यही
खुद जिओ और जीने दो
कुछ सीखो रोशनी से
कुछ अंधेरो से सबक लो
रचकर इतिहास नया
रच दो एक बेहतर दुनिया
कुछ फूलो सा महको
कुछ सागर सा गरजो
जिनकी राह ना कोई
उनकी सड़क बन जाओ
अडिग पर्वत से बनो
कोमल रहो लेकिन मन से
बदल दो दुनिया की चाल
बदलकर अपनी चाल
प्रकृति की सुन्दर कक्षा
मन के नैनो से पढ़लो
जीने का अंदाज़ यही
खुद जिओ और जीने दो
मंगलवार, 21 नवंबर 2017
इश्क़ के रंग
Courtesy :Picsabay
इश्क़ के न पूछ रंग कितने सारे है
बेरंग सी दुनिया में इंद्रधुष की मानिंद
आँखे झील सी, शहर गुलाबी नज़र आते है
श्वेत सी चादर पर कमल नए खिल जातें है
ज़िन्दगी में एक नयी महक का अहसास होता है
बिन वजह होठो पर मुस्कान ठहर जाती है
पांव ज़मीन पर नहीं रहते
सपनो को पंख लग जातें है
मत पूछो हाल ए इश्क़ यारो
तबियत इश्क़ में
कभी बेहतर,कभी रूठी नज़र आती है
इश्क़ के न पूछ रंग कितने सारे है
बेरंग सी दुनिया में इंद्रधुष की मानिंद
आँखे झील सी, शहर गुलाबी नज़र आते है
श्वेत सी चादर पर कमल नए खिल जातें है
ज़िन्दगी में एक नयी महक का अहसास होता है
बिन वजह होठो पर मुस्कान ठहर जाती है
पांव ज़मीन पर नहीं रहते
सपनो को पंख लग जातें है
मत पूछो हाल ए इश्क़ यारो
तबियत इश्क़ में
कभी बेहतर,कभी रूठी नज़र आती है
शनिवार, 11 नवंबर 2017
गुरुवार, 2 नवंबर 2017
आज़ादी -New Woman
Courtesy: The happy world.com
कुछ गफलत में ज़माना है
मौन तोड़ उसे बताना है
किस्मत बुलंद है मेरी
बारी है पत्थरो के पिघलने की
सहनशक्ति ताकत है मेरी
सहना मेरी मज़बूरी नहीं
हार जीत में बदल दूंगी
इरादे नेक है,रास्ते अनेक है
सफर किया तेरे साथ जितना
सफर तय कर सकती हूँ
सपनो की मंज़िल का
सहनशक्ति ताकत है मेरी
सहना मेरी मज़बूरी नहीं
संस्कार की बलिवेदी तुझे प्रणाम
बांधने लगी जब ज़ंज़ीरे
जकड़ने लगी जब तकदीरे
उन्मुक्त गगन से पता पूछा
एक नयी मंज़िल का
बांहे पसार तैयार हूँ उड़ने को
सहनशक्ति ताकत है मेरी
सहना मेरी मज़बूरी नहीं
कुछ गफलत में ज़माना है
मौन तोड़ उसे बताना है
किस्मत बुलंद है मेरी
बारी है पत्थरो के पिघलने की
सहनशक्ति ताकत है मेरी
सहना मेरी मज़बूरी नहीं
हार जीत में बदल दूंगी
इरादे नेक है,रास्ते अनेक है
सफर किया तेरे साथ जितना
सफर तय कर सकती हूँ
सपनो की मंज़िल का
सहनशक्ति ताकत है मेरी
सहना मेरी मज़बूरी नहीं
संस्कार की बलिवेदी तुझे प्रणाम
बांधने लगी जब ज़ंज़ीरे
जकड़ने लगी जब तकदीरे
उन्मुक्त गगन से पता पूछा
एक नयी मंज़िल का
बांहे पसार तैयार हूँ उड़ने को
सहनशक्ति ताकत है मेरी
सहना मेरी मज़बूरी नहीं
शनिवार, 14 अक्टूबर 2017
धुँए में ज़िन्दगी ...( नशा ही नशा है )
Pic Courtesy : Word Press.com
नशे में है जग सारा
कही नींद कहीं
मह का साया
कही सौंदर्य जाल
कही ग्लैमर की माया
लड़खड़ाए कदम
बहकी आवाज़ें
नशे की गिरफ्त में
शरीर से..आत्मा ज्यादा
बातें कुछ कम
शोर बहुत ज्यादा
साहस सिमटा
दंभ ने घेरा
मंद पड़ती जिज्ञासाएं
तीव्र होती आकांक्षाएं
जल्दबाज़ी में बढ़ती ज़िंदगिया
देरी से मिलती राहें
फिर भी पहचान ना पाए
क्यों खो रही हैं
तेरी मेरी नयी राहें
नशे में है जग सारा
कही नींद कहीं
मह का साया
कही सौंदर्य जाल
कही ग्लैमर की माया
लड़खड़ाए कदम
बहकी आवाज़ें
नशे की गिरफ्त में
शरीर से..आत्मा ज्यादा
बातें कुछ कम
शोर बहुत ज्यादा
साहस सिमटा
दंभ ने घेरा
मंद पड़ती जिज्ञासाएं
तीव्र होती आकांक्षाएं
जल्दबाज़ी में बढ़ती ज़िंदगिया
देरी से मिलती राहें
फिर भी पहचान ना पाए
क्यों खो रही हैं
तेरी मेरी नयी राहें
शनिवार, 16 सितंबर 2017
ओल्ड इस गोल्ड
Pic Courtesy :Flickr
सरलता सहजता
गुम जब से हो गयी
ज़िन्दगी अजनबी
कुछ और बन गयी है
दोस्त बन रहे है
तकनीक और तेजी
मिलावट का नया
दस्तूर बन गया है
मिठास की जगह
मीठी बातों ने ली है
अपनों की जगह
बेगानो की झड़ी है
सादगी की जगह
भड़कते श्रृंगार ने ली है
प्रकृति का मोल घटा
विकसित नई पीढ़ी हुई है
ओल्ड इस गोल्ड
कहते है क्यों सोचो
खो गया है क्या
बदलते युग की भीड़ में देखो
सरलता सहजता
गुम जब से हो गयी
ज़िन्दगी अजनबी
कुछ और बन गयी है
सरलता सहजता
गुम जब से हो गयी
ज़िन्दगी अजनबी
कुछ और बन गयी है
दोस्त बन रहे है
तकनीक और तेजी
मिलावट का नया
दस्तूर बन गया है
मिठास की जगह
मीठी बातों ने ली है
अपनों की जगह
बेगानो की झड़ी है
सादगी की जगह
भड़कते श्रृंगार ने ली है
प्रकृति का मोल घटा
विकसित नई पीढ़ी हुई है
ओल्ड इस गोल्ड
कहते है क्यों सोचो
खो गया है क्या
बदलते युग की भीड़ में देखो
सरलता सहजता
गुम जब से हो गयी
ज़िन्दगी अजनबी
कुछ और बन गयी है
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