शनिवार, 12 नवंबर 2016
शुक्रवार, 4 नवंबर 2016
मंगलवार, 25 अक्टूबर 2016
ख़ुशी के मायने बदल गए है
ख़ुशी का अर्थ बदल गया लगता है
पहले लोग अपनों की आखो में ख़ुशी ढूंढा करते थे
अब आईने के सामने बुत बनकर खड़े रहते है
ख़ुशी बाँटने वाले भी घर में सीमित हो गए है क्योकि
बुजुर्गो को ओल्ड ऐज होम में छोड़ना फैशन बन गया है
मन ज्यादा मचले तो पुरानी एल्बम का फोटो फेसबुक पर अपलोड होगा
छुट्टी लेकर परिवार के साथ शॉपिंग का तो ज़माना लद गया है
ऑनलाइन शॉपिंग ने ख़ुशी की buy one get one free के नीचे कब्र जो बना दी है
पाप का हाथ पकड़कर जिद करना भी ख़ुशी का दूसरा नाम है शायद
त्यौहार पर बहाने से पडोसी के घर बेवजह पहुँच जाते थे
अब टीवी पर दिनों दिन बढ़ते चैनल वक्त नहीं देते शायद
ख़ुशी अब मोहल्ले से रूठकर सॅटॅलाइट से ट्रांसफर होती है
पहले लोग अपनों की आखो में ख़ुशी ढूंढा करते थे
अब आईने के सामने बुत बनकर खड़े रहते है
ख़ुशी बाँटने वाले भी घर में सीमित हो गए है क्योकि
बुजुर्गो को ओल्ड ऐज होम में छोड़ना फैशन बन गया है
मन ज्यादा मचले तो पुरानी एल्बम का फोटो फेसबुक पर अपलोड होगा
छुट्टी लेकर परिवार के साथ शॉपिंग का तो ज़माना लद गया है
ऑनलाइन शॉपिंग ने ख़ुशी की buy one get one free के नीचे कब्र जो बना दी है
पाप का हाथ पकड़कर जिद करना भी ख़ुशी का दूसरा नाम है शायद
त्यौहार पर बहाने से पडोसी के घर बेवजह पहुँच जाते थे
अब टीवी पर दिनों दिन बढ़ते चैनल वक्त नहीं देते शायद
ख़ुशी अब मोहल्ले से रूठकर सॅटॅलाइट से ट्रांसफर होती है
सोमवार, 24 अक्टूबर 2016
प्रभु इच्छा,God Wish
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शनिवार, 22 अक्टूबर 2016
अतिथि देवो भवः
अतिथि देवो भवः
भारत की भूमि पर हर घर में यही संस्कार पले
फिर क्यों विदेशी सैलानी हर बार ठगे जाते है
पूरे विश्व में फैली ख्याति जिन संस्कारो की
आज वही पर मैली हो गयी चादर उन संस्कारो की
एक छोटे से हित के खातिर फिर बलि चढ़ गए संस्कार
आखिर कितने छोटे पड गए अपने ही घर में हम आज
राह दिखाने वाले ने राहगीर को लूट लिया
एक रिश्ता विश्वास का था वो भी खुद से छीन लिया
भारत की भूमि पर हर घर में यही संस्कार पले
फिर क्यों विदेशी सैलानी हर बार ठगे जाते है
पूरे विश्व में फैली ख्याति जिन संस्कारो की
आज वही पर मैली हो गयी चादर उन संस्कारो की
एक छोटे से हित के खातिर फिर बलि चढ़ गए संस्कार
आखिर कितने छोटे पड गए अपने ही घर में हम आज
राह दिखाने वाले ने राहगीर को लूट लिया
एक रिश्ता विश्वास का था वो भी खुद से छीन लिया
शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016
दिवाली
कितना कुछ बदल जाता है हर साल दिवाली पर
कोई बदले घर का रंग रोगन, कोई बदले सजावट
कही पनपे नयी उम्मीदे,कही सजते नए सपने
खेतो में रबी की बोई जाती है कहीँ नई फसले
रसोई में महकने लगती है नए धान की खुशबू
बाज़ारो की रौनक देख दंग रह जाते विदेशी सैलानी
दिवाली को भारत की धरती पर जगमग करते लाखो दिए
माँ लक्ष्मी के आशीष से धन धान्य का वैभव ऐसा देख
देवो के देव महादेव भी धरती भ्रमण को निकलते
गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016
हँसना कब से भूल चुके थे हम
हँसने की एक वजह कहाँ से लाये
रोज रोज की भागम भाग निराशा ही भर जाये
कोई खींचे, कोई पीछे, जीवन अश्को में ही बीते
हँसना कब से भूल चुके थे हम
फिर एक दिन एक चेहरा ढेरो खुशियां लाया
हफ्ते के दो दिनों को उत्सव समान बनाया
ना अभद्र व्यवहार, ना अशिष्ट ही भाषा
भोले से चेहरे ने रोते को भी हँसाया
सीधी सच्ची बातें जीवन में पल में देते उतार
कुछ घंटो में जग में भर देते कपिल जीने की शक्ति अपार
रोज रोज की भागम भाग निराशा ही भर जाये
कोई खींचे, कोई पीछे, जीवन अश्को में ही बीते
हँसना कब से भूल चुके थे हम
फिर एक दिन एक चेहरा ढेरो खुशियां लाया
हफ्ते के दो दिनों को उत्सव समान बनाया
ना अभद्र व्यवहार, ना अशिष्ट ही भाषा
भोले से चेहरे ने रोते को भी हँसाया
सीधी सच्ची बातें जीवन में पल में देते उतार
कुछ घंटो में जग में भर देते कपिल जीने की शक्ति अपार
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