गुरुवार, 11 जनवरी 2018
सोमवार, 1 जनवरी 2018
शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017
दम घुट रहा था अब तक
घुटन थी दरवाज़े के उस पार
ना आवाज़ सुनने वाला था कोई
ना आवाज़ निकलने देता था कोई
सिर्फ आँखे बोलती नज़र आती थी
मगर उस भाषा का जानकर ना था कोई
होठो के बीच फंसे अपने ही शब्दों की
आवाज़ सुनने का मन करता है
आज खुलकर सांस लेने का मन करता है
ज़िन्दगी नाम की थी जिस शख़्स के
उसके हर सितम का जवाब दे सकती हूँ मैं
आज लगता है हवा का रुख बदल रहा है
छोटे ही सही इस ठन्डे झोंके को
सलाम करने का मन करता है
गुरुवार, 21 दिसंबर 2017
मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
शनिवार, 9 दिसंबर 2017
एक नयी दुनिया बनायें
Pic Courtesy:Toddler.org
कुछ सीखो रोशनी से
कुछ अंधेरो से सबक लो
रचकर इतिहास नया
रच दो एक बेहतर दुनिया
कुछ फूलो सा महको
कुछ सागर सा गरजो
जिनकी राह ना कोई
उनकी सड़क बन जाओ
अडिग पर्वत से बनो
कोमल रहो लेकिन मन से
बदल दो दुनिया की चाल
बदलकर अपनी चाल
प्रकृति की सुन्दर कक्षा
मन के नैनो से पढ़लो
जीने का अंदाज़ यही
खुद जिओ और जीने दो
कुछ सीखो रोशनी से
कुछ अंधेरो से सबक लो
रचकर इतिहास नया
रच दो एक बेहतर दुनिया
कुछ फूलो सा महको
कुछ सागर सा गरजो
जिनकी राह ना कोई
उनकी सड़क बन जाओ
अडिग पर्वत से बनो
कोमल रहो लेकिन मन से
बदल दो दुनिया की चाल
बदलकर अपनी चाल
प्रकृति की सुन्दर कक्षा
मन के नैनो से पढ़लो
जीने का अंदाज़ यही
खुद जिओ और जीने दो
मंगलवार, 21 नवंबर 2017
इश्क़ के रंग
Courtesy :Picsabay
इश्क़ के न पूछ रंग कितने सारे है
बेरंग सी दुनिया में इंद्रधुष की मानिंद
आँखे झील सी, शहर गुलाबी नज़र आते है
श्वेत सी चादर पर कमल नए खिल जातें है
ज़िन्दगी में एक नयी महक का अहसास होता है
बिन वजह होठो पर मुस्कान ठहर जाती है
पांव ज़मीन पर नहीं रहते
सपनो को पंख लग जातें है
मत पूछो हाल ए इश्क़ यारो
तबियत इश्क़ में
कभी बेहतर,कभी रूठी नज़र आती है
इश्क़ के न पूछ रंग कितने सारे है
बेरंग सी दुनिया में इंद्रधुष की मानिंद
आँखे झील सी, शहर गुलाबी नज़र आते है
श्वेत सी चादर पर कमल नए खिल जातें है
ज़िन्दगी में एक नयी महक का अहसास होता है
बिन वजह होठो पर मुस्कान ठहर जाती है
पांव ज़मीन पर नहीं रहते
सपनो को पंख लग जातें है
मत पूछो हाल ए इश्क़ यारो
तबियत इश्क़ में
कभी बेहतर,कभी रूठी नज़र आती है
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