गुरुवार, 11 जनवरी 2018

इश्क़ नहीं आसां

Pic Courtsey:Google
इश्क़ की गली से ना 
गुज़रना कभी 
रूह पीछे छोड़ देह 
आगे बढ़ जाएगी 

ज़िन्दगी का नाम 
शेष होगा 
ज़िन्दगी बहुत पीछे 
छूट जाएँगी 

बातें मुलाकाते 
खूब होंगी लेकिन 
किसी खास का इंतज़ार 
हर पल रहेगा 

इश्क़ की गली से ना 
गुज़रना कभी 
ख़्वाब सिमट जायेंगे 
हक़ीक़त रूबरू होगी 

सोमवार, 1 जनवरी 2018

नई इबारत

Nai ibarat
Pic Courtsey:Google
ना कागज़ पर 
ना कलम से 
लिखना है हमको 
तकदीर कर्म से 
जो बीत गई 
वो बात गई 
उठो, बढ़ो 
लेकर नया जोश
नई चुनौतियां 
नए रास्तें 
पर याद रखो 
पुराने अनुभव 
नज़र मंज़िल पर  
और दृढ इरादे 
फिर कौन रोकेगा 
सफर के रास्तें 

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

दम घुट रहा था अब तक

life in hell

घुटन थी दरवाज़े के उस पार 
ना आवाज़ सुनने वाला था कोई 
ना आवाज़ निकलने देता था कोई 
सिर्फ आँखे बोलती नज़र आती थी 
मगर उस भाषा का जानकर ना था कोई 
होठो के बीच फंसे अपने ही शब्दों की 
आवाज़ सुनने का मन करता है 
आज खुलकर सांस लेने का मन करता है 
ज़िन्दगी नाम की थी जिस शख़्स के 
उसके हर सितम का जवाब दे सकती हूँ मैं 
आज लगता है हवा का रुख बदल रहा है 
छोटे ही सही इस ठन्डे झोंके को 
सलाम करने का मन करता है 

गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

आज की सुर्खियां


aaj ki surkhiyan

Pic Courtesy:
कल का अख़बार कौन पढ़ता है यहाँ
नई दुनिया की बात करता है जहां

कल की सीढ़ी पर पैर रखते है सभी 
आज की ऊंचाइयां छूने के लिए 

पुराने घाव रिसते है जहाँ  
नए सफर सफल होते है वहां  

अनुभव की पीठ पर सवार है जहां 
सुर्खियों में बात सिर्फ आज की होती है यहाँ?

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

कोहरा

Fog
Pic Courtsey :google
रंगीन चश्मे की
आज ज़रूरत नहीं
कोहरे ने दूधिया
मौसम जो कर दिया
रौशनी चुभती थी
कुछ आँखो को
मावठ की सुबह ने
उन ज़र्द चेहरों को ढक दिया

शनिवार, 9 दिसंबर 2017

एक नयी दुनिया बनायें

ek naya suraj
Pic Courtesy:Toddler.org
कुछ सीखो रोशनी से 
कुछ अंधेरो से सबक लो 
रचकर इतिहास नया 
रच दो एक बेहतर दुनिया 

कुछ फूलो सा महको 
कुछ सागर सा गरजो
जिनकी  राह ना कोई 
उनकी सड़क बन जाओ

अडिग पर्वत से बनो 
कोमल रहो लेकिन मन से 
बदल दो दुनिया की चाल
बदलकर अपनी चाल 

प्रकृति की सुन्दर कक्षा
मन के नैनो से पढ़लो 
जीने का अंदाज़ यही 
खुद जिओ और जीने दो 

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

इश्क़ के रंग

Courtesy :Picsabay

इश्क़ के न पूछ रंग कितने सारे है 
बेरंग सी दुनिया में इंद्रधुष की मानिंद 

आँखे झील सी, शहर गुलाबी नज़र आते है 
श्वेत सी चादर पर कमल नए खिल जातें है 

ज़िन्दगी में एक नयी महक का अहसास होता है 
बिन वजह होठो पर मुस्कान ठहर जाती है 

पांव ज़मीन पर नहीं रहते 
सपनो को पंख लग जातें है 

मत पूछो हाल ए इश्क़ यारो 
तबियत इश्क़ में 
कभी बेहतर,कभी रूठी नज़र आती है