शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

शिकायत

Poetry,india,woman,complaning

जैसा लोग सोचते हैं हम वैसे तो नहीं
इतना खुलने की हमे जरूरत भी नहीं

खुली किताब क्यों बने उनके लिए

जिनके लिए हम कुछ भी नहीं


मन में क्यों उचाट हो उनके लिए
जिन्हे हमारे इन्सान होने की खबर ही नहीं 


पत्थर है हम भी हलचल की हमें खबर ही नहीं
अपने सम्मान के लिए जीना सब चाहते हैं
एक तुम ही उस आवरण में पोशीदा तो नहीं

9 टिप्‍पणियां:

  1. sach hai jise aap par bharosa nahi ya aap jinke liye ahamiyat nahi rakhte unke liye khuli kitab kyo bane

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  2. Jo samajhna na chahe unke liye khulne ki zarurat bhi nahi..touching fact

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  3. Jo samajhna na chahe unke liye khulne ki zarurat bhi nahi..touching fact

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  4. True why should we be open for those who never care for us...

    regards
    A great Fan

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