शनिवार, 22 अक्तूबर 2016

अतिथि देवो भवः

 

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अतिथि देवो भवः
भारत की भूमि पर हर घर में यही संस्कार पले
फिर क्यों विदेशी सैलानी हर बार ठगे जाते है
पूरे विश्व में फैली ख्याति जिन संस्कारो की
आज वही पर मैली हो गयी चादर उन संस्कारो की
एक छोटे से हित के खातिर फिर बलि चढ़ गए संस्कार
आखिर कितने छोटे पड गए अपने ही घर में हम आज
राह दिखाने वाले ने राहगीर को लूट लिया
एक रिश्ता विश्वास का था वो भी खुद से छीन लिया

8 टिप्‍पणियां:

  1. We should not forget our culture..thanks for reminding the fact

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  2. Bharat ki garima ka khayal rakhna hoga...kuch log kuch galat examples desh ki seerat kyo badle

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  3. आदर सत्कार जिस देश की प्रथा है वह ये सब निंदनीय है ...हर भारतीय इसका विरोध करता है

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  4. guest bhagwan hai bado se seekha hai ..is sachai ko mat badlo bhai...

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