बुधवार, 25 मार्च 2009

वजूद

मैं कौन हूँ क्या हूँ जब जब मैं यह सोचती हूँ मुझे चलता फिरता एक अख्स नज़र आता है जिसकी भीड़ मैं कोई पहचान नही बन पाई है ...कोशिश है इस भीड़ मैं ख़ुद को तलाश करने की अपने वजूद को पाने की उसको सजाने की उसको सवारने की
वजूद मेरा तभी है जब मैं ख़ुद को समाज से जोड़ पाऊ और यही नही अपनी किसी एक अच्छाई से समाज को कोई दिशा दे पाऊ..इस दिशा मे बढ़ने के लिए समाज मैं नया गढ़ने के लिए अपनी आवाज़ से अपने वजूद को तरासतीऔर तलाशती रहूंगी॥
मेरे वजूद को बरक़रार रखने के लिए आपके साथ आपकी सलाह की हर वक्त ज़रूरत होगी ॥

मेरा साथ दे मेरे साथ चले

4 टिप्‍पणियां:

  1. yek aksh aur yek shaksh ke milne se he wozood me aata hai samaj .samaj ke wazood me anne se he desh ka wozood banta hai . aapke wazood mei awwaz hai nari ki aur nari hi nirmarta hai samaj ki .aapke wazood se he kayam hai hum sab ka wazood . dil se dua hai khuda isae kayam rakhe

    उत्तर देंहटाएं
  2. hum aapke saat hain aur rahenge... hamain yakeen hai ke aap aapka apni yek veshesh wazood baneyenge..all the best

    उत्तर देंहटाएं
  3. hum sath hai jee apkai. is rah mai chalnai mai humai fakra hoga. Akhir yeh hamarai desh ka mamla hai. we love India.

    उत्तर देंहटाएं
  4. Thats true
    You R What u Think, With ur thought U Make Ur World.
    So Its Depend on U , Which Kind of World u Want to live In.

    उत्तर देंहटाएं